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बिड प्राइस वह कीमत है जिस पर बाजार (या ब्रोकर) किसी करेंसी जोड़ी को आपसे खरीदने को तैयार है। यानी जब आप बेचते हैं, तो आपको बिड प्राइस मिलता है।

बिड प्राइस क्या है और कैसे काम करता है?

फॉरेक्स क्वोट में हमेशा दो कीमतें दिखती हैं: Bid (जिस पर आप बेच सकते हैं) और Ask (जिस पर आप खरीद सकते हैं)। Bid हमेशा Ask से कम होता है और दोनों के बीच का अंतर स्प्रेड है। उदाहरण: EUR/USD 1.0850 / 1.0852 में 1.0850 bid है और 1.0852 ask है। यदि आप EUR/USD बेचना चाहते हैं, तो आपको 1.0850 मिलेगा। bid/ask प्रणाली एक interbank market से आती है जहां बड़े बैंक कीमतें कोट करते हैं और ECN ब्रोकर इन्हें सीधे ट्रेडर्स को पास करते हैं।

Bid Depth और ऑर्डर बुक

ECN और DMA ब्रोकर पर Market Depth (Level 2 data) देखने पर आप कई bid levels देख सकते हैं। उदाहरण के लिए, 1.0850 पर $5 मिलियन की bid, 1.0849 पर $12 मिलियन की bid। यह दिखाता है कि कीमत गिरने पर कितनी मांग है। बड़े ट्रेडर्स इस order book data का उपयोग करते हैं यह तय करने के लिए कि कहां support levels हैं। भारत में NSE Currency के CDS सेगमेंट में भी Level 2 डेटा उपलब्ध है जो USD/INR के order flow को दर्शाता है।

Bid/Ask और भारतीय ट्रेडर्स

भारत में USD/INR फ्यूचर्स का bid-ask स्प्रेड आमतौर पर 0.25-1 पिप्स होता है, जो बहुत तंग है। यह उच्च तरलता के कारण है क्योंकि बड़े बैंक और HFT firms इस बाजार में सक्रिय हैं। विदेशी ब्रोकरों पर EUR/USD जैसे major pairs पर स्प्रेड 0.1-1.5 पिप्स है। NFP, FOMC या RBI MPC के आसपास स्प्रेड बहुत बढ़ सकता है (10-20 पिप्स तक) क्योंकि ब्रोकर जोखिम संरक्षण करते हैं। खरीदते समय हमेशा ask pay करते हैं और बेचते समय bid receive करते हैं; यह स्प्रेड ब्रोकर का मुख्य मुनाफा है। आस्क प्राइस (Ask Price), स्प्रेड (Spread), बिड-आस्क स्प्रेड भी पढ़ें।

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