वोलैटिलिटी किसी मुद्रा जोड़ी की कीमत में उतार-चढ़ाव की दर और परिमाण का माप है। अधिक वोलैटिलिटी का मतलब बड़ी कीमत चालें, अधिक अवसर लेकिन अधिक जोखिम।
वोलैटिलिटी क्या है और कैसे मापी जाती है?
वोलैटिलिटी किसी परिसंपत्ति की कीमत कितनी जल्दी और कितनी दूर बदलती है इसका माप है। कम वोलैटिलिटी वाली जोड़ियां (EUR/CHF, USD/SGD) धीरे-धीरे चलती हैं और शांत दिनों में 30-50 पिप्स तक, जबकि उच्च वोलैटिलिटी (GBP/JPY, USD/TRY, USD/INR NFP के समय) 200-500 पिप्स तक हिल सकती हैं। वोलैटिलिटी मापने के मुख्य तरीके: ATR (Average True Range), Bollinger Bands चौड़ाई, Standard Deviation और VIX जैसे implied volatility इंडेक्स। उच्च ATR = अधिक वोलैटिलिटी।
वोलैटिलिटी और ट्रेडिंग रणनीति
विभिन्न रणनीतियां अलग वोलैटिलिटी स्तर पर काम करती हैं। Breakout ट्रेडर्स उच्च वोलैटिलिटी पसंद करते हैं क्योंकि कीमत support/resistance को तेज़ी से पार करती है। Range ट्रेडर्स कम वोलैटिलिटी में काम करते हैं, support पर खरीदते और resistance पर बेचते हैं। समाचार के समय (NFP, RBI MPC, FOMC) वोलैटिलिटी 3-5 गुना बढ़ जाती है, और इस दौरान stop loss व्यापक रखना चाहिए। Implied volatility options बाजार से आती है और भविष्य की अपेक्षित चाल दर्शाती है।
भारतीय ट्रेडर्स के लिए वोलैटिलिटी
USD/INR आम तौर पर 30-80 पिप्स प्रति दिन चलता है, जो EUR/USD (50-100 पिप्स) की तुलना में शांत है। लेकिन RBI हस्तक्षेप, तेल कीमत shock, या US यील्ड spike पर यह 150-300 पिप्स तक कूद सकता है। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान USD/INR ने कुछ ही हफ्तों में 79 से 83 तक छलांग लगाई। ATR-based position sizing आपको वोलैटिलिटी के अनुसार lot साइज़ adjust करने देता है: उच्च ATR = छोटा lot। एवरेज ट्रू रेंज (ATR), बोलिंजर बैंड्स, इम्प्लाइड वोलैटिलिटी (IV) भी पढ़ें। पोज़ीशन साइज़ कैलकुलेटर से सटीक गणना करें।
संबंधित शब्द
हिस्टोरिकल वोलैटिलिटी
Historical Volatility (HV) किसी asset की past price movements से calculated volatility है। यह actual realized movement measure करती है, implied nहीं।
इम्प्लाइड वोलैटिलिटी (IV)
Implied Volatility (IV) वह volatility है जो option की current market price में implied है, forward-looking expectation of price movement। Historical volatility past-based है।
एवरेज ट्रू रेंज (ATR)
ATR एक volatility indicator है जो किसी asset की average दैनिक price range मापता है। यह stop loss और position size निर्धारित करने के लिए बहुत उपयोगी है।
बोलिंजर बैंड्स
Bollinger Bands एक volatility indicator है जिसमें middle band (20-SMA) और उसके ऊपर/नीचे दो bands standard deviations पर होते हैं। Volatility के अनुसार expand/contract करते हैं।
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